मैं हिन्द का निवासी हूँ, हिंदुत्व मेरा धर्म है, राज-भाषा का प्रहरी हूँ, हिंदी सेवा मेरा कर्म है।
बुधवार, 24 फ़रवरी 2016
सोमवार, 15 फ़रवरी 2016
इन्द्रेश जी की "बसंत" ऋतु पर अवधी कविता
इन्द्रेश जी की "बसंत" ऋतु पर अवधी कविता
पंचो,
बसन्त में जब
घर में कन्त
नहीं रहत तो
तो बसन्तो बैरी
जस लागत है/द्याखैं एकु छन्द मा-
बर
वेस विसेस धरे
धरती,
अनमोल छटा दिखलाय रही/
नर-नारिनि के मन माँहि सदा,
वह प्रेम- पयोधि बहाय रही/
भँवरा गुलजार करैं बगिया,
अरु कोयल कूक सुनाय रही/
बरि जाय बसन्त न कन्त घरै,
बिरहा तन पीर जगाय रही/
अनमोल छटा दिखलाय रही/
नर-नारिनि के मन माँहि सदा,
वह प्रेम- पयोधि बहाय रही/
भँवरा गुलजार करैं बगिया,
अरु कोयल कूक सुनाय रही/
बरि जाय बसन्त न कन्त घरै,
बिरहा तन पीर जगाय रही/
इन्द्रेश भदौरिया*रायबरेली*
शनिवार, 13 फ़रवरी 2016
सन राईज पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव की शुभकामनायें एवं विद्या एवं ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदे को नमन एवं वन्दन !!!
सम्माननीय इन्द्रेश जी को स्कूल के वार्षिकोत्सव की शुभकामनायें प्रेषित करता हूँ, एवं विद्या एवं ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा के पावन चरणों में अपना समर्पणाग्रह निवेदित करता हूँ।
मेरी माँ शारदा से प्रार्थना है, हमारे ग्राम-पुर में भी अपनी ज्ञानरूपी अमृत-धारा का हमारी नव भावी पीढ़ी पर प्रवाह करें,
जिससे की हम लोग जो अभी तक पराकाष्ठा के जिस आकाश को आज तक नहीं छू पाये, जिसके लिये प्रयासरत हैं, भावी पीढ़ी उन सभी पराकाष्ठा-रूपी आकाश की नवीन ऊँचाइयों को छू सकें।
प्रार्थनार्थी,
माँ शारदे का अबोध पुजारी
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016
बसंतोत्सव की सभी को हर्दिक शुभकामनाएँ एवं माँ शारदे को नमन एवं वन्दन् !!!!!!!
बसंत की
बगिया में
देखो कैसा गीत सजा है
इस बसंत की बगिया में,
कुहकी कोयलिया मतवाली
पुरवाई लहराई है
महकी ख़ुश्बू आँचल में ये
अपने भर कर लायी है
भँवरे ने फिर गुंजन की
कली-कली मुस्कायी है,
देखो कैसा रूप सजा है
इस बसंत की बगिया में,
झूम उठा कवि-कोमल मन
आमों पर बोरें आई हैं
हरियाली छायी वृक्षों पर
कोमल पत्ती लहराई है
तितली फिरती है फूलों पर
पीली सरसों लहराई है
देखो कैसा विश्वास जगा है
इस बसंत की बगिया में,
तम के बादल छंटते ही
प्रकाश धरा पर छाता है
पतझड़ का साया हटते ही
ऋतुराज धरा पर आता है
दुःख की ऋतु के बीतते ही
फिर सुख का मौसम आता है
नव आशा का उजवास छुपा है,
इस बसंत की बगिया में ।।
बुधवार, 10 फ़रवरी 2016
शनिवार, 6 फ़रवरी 2016
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016
बुधवार, 3 फ़रवरी 2016
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016
इन्द्रेश भदौरिया जी *रायबरेली* की अवधी कविता की पंक्तियाँ
इन्द्रेश भदौरिया जी *रायबरेली*
माननीय इन्द्रेश जी ग्रामसभा कठवारा फेस-बुक पृष्ठ के वरिष्ठ सदस्य हैं, अपने मुक्तक पर जब मैंने इन्द्रेश जी का लाइक देखा, तभी मेरे मन में इनके व्यक्तित्व को जानने की जिज्ञासा हुई, मैंने फेस-बुक पर जाकर देखा तो,
कविता के सौंदर्य के बारे में इन्द्रेश जी की अवधी भाषा की शुद्ध एवं मनोहारी पंक्तियाँ पढ़-कर मेरा मन मुग्ध हो, हृदय प्रफुल्लित हो गया और कविता के विषय में मेरा आदर और भी बढ़ गया।
इन्द्रेश जी अगर आप भी मेरा ये सन्देश पढ़ें, तो मुझे भी अपना पावन आशीर्वाद प्रदान करें,
जिससे मेरी कविताओं में भी ह्रदय को प्रभवित कर देने वाले भावों का समावेश हो सके।
आपका स्नेहाभिलाषी,
मनोज यादव
प्रस्तुत हैं, इन्द्रेश जी की अवधी कविता की पंक्तियाँ आशा है, ये पंक्तियाँ आप सभी के ह्रदय की गहराईयों को अवश्य छुएँगी,
कविता
की सुन्दरता
****************
कविता
वह जग में
सुन्दर है,
तन की पँखुरी सरसाय दियै/
सुनिके सुर-ताल मलाल न हो,
मन प्रेम-सुधा बरसाय दियै/
मनई सब भूलि जाय दुख का,
मन मोद-प्रमोद बढ़ाय दियै/
सुख देय सदा तनका-मनका,
नर-नारिन को हरसाय दियै//
तन की पँखुरी सरसाय दियै/
सुनिके सुर-ताल मलाल न हो,
मन प्रेम-सुधा बरसाय दियै/
मनई सब भूलि जाय दुख का,
मन मोद-प्रमोद बढ़ाय दियै/
सुख देय सदा तनका-मनका,
नर-नारिन को हरसाय दियै//
इन्द्रेश भदौरिया* रायबरेली*
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